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पाखी


...."पाखी"

मेरे तकिए के "सिरहाने" रखी हुई "अर्द्ध-पूर्ण"वो "डायरी" आज भी "जिसके पन्नो के बीच"रखा हुआ "मोरपंख"तुम्हारी "अप्रितम"यादों का साक्षी" है..।।

चिड़िया की तरह"चहकता"......"तुम्हारा-प्रेम"मेरी "विलुप्त" होती "सांसें"उसी "मोरपंख" से "जीवांत" है..।।

@राघव

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