उसने दिल-बिच "इश्क़" "बोया" है

बिन-आँसू के वो "ताउम्र" "रोया" है..।।


.....सुबक-सुबक के "धड़कन" चलती

अकड़-अकड़ होठों में "अकड़न" होती

बिन-पानी "आंखों से दर्द" बहाया है..।।


"मीत नही"

"मनप्रीत नही"

"जग से उसकी"

"कोई रीत नही"

"उसकी रात इश्क़"

"उसकी बात इश्क़"

उसकी याद इश्क़.

उसकी रब्त इश्क़.

उसकी जात इश्क़.

उसकी पात इश्क़.

उसका नशा इश्क़.

दिल मे कसा इश्क़.

दुनिया से भी कटा-कटा रहता.

खुद ही खुद से बटा-बटा रहता.

इश्क़ बनाई स्याही से....

उसका अल्फ़ाज़ सजा-सजा रहता.

उसकी एक झलक पाने को...

विरही चकोर बना-बना रहता..।।


@राघव