..."एहसास"
तुम्हारी "यादों" के
बोझ से "मेरी-स्वासों"
की गति "शिथिल" हो जाती है..।।
"नित-नये-पल" ह्रदय
"कंम्पन" करता है"
"आत्मा" की "स्तब्धता"
"बिन-तुम्हारे"
"धूमिल" हो जाती है..।।
मैं "गढ़ता" हूँ
आँसुओं के "मोतियों" से
"अभेद विरह-माला"
जब भी "आंखों" में
"नीद" भर आती है..।।
@राघव


