मुझे जब भी किसी को इमोजी भेजना होता है तो मेरे मस्तिष्क में जो पहली इमेज बनती है वह है मैपल लीफ़ ।

हाँ! मैं इसकी आकृति और रंग का दीवाना हूँ इसलिए नहीं कि यह हमारे प्रिय वृक्ष चिनार की भीड़ में खो कर भ्रम उत्पन्न कर सकता है बल्कि इसलिए भी क्योंकि यह बहुत उपयोगी है । मैं इसके उपयोग की बात बाद में करूँगा, पहले यह बता दूँ कि हिमालय में मैपल से मिलती जुलती पत्तियों वाले वृक्ष मुझे बहुत आकर्षित करते हैं जिन्हें दूर से देखते ही मैं बच्चों की तरह उछल पड़ता हूँ । कई बार मेरा उनके पास तक पहुँचना सम्भव नहीं होता । मैं पास जाकर उस वृक्ष को देखना और छूना चाहता हूँ, उसकी छाँव में बैठकर बहुत देर तक उससे बातें करना चाहता हूँ । मैं लोगों से पूछता हूँ – वह मैपल ही है न! फिर उत्तर मिलते ही निराश हो जाता हूँ ।

जहाँ चिनार के वृक्ष बहुत विशाल और ऊँचे होते हैं वहीं मैपल के वृक्ष सामान्य ऊँचाई के और कभी-कभी तो झाड़ी जैसे भी होते हैं । त्रिशूल जैसे नुकीले शिखरों वाली मैपल की रंगीन पत्तियाँ ख़ूबसूरत होती हैं लेकिन मैपल वृक्ष का तना तो और भी कमाल का होता है । जिस तरह हम अल्मोड़ा में चीड़ के तने से तारपीन का तेल बनाने के लिए सैप निकालते हैं उसी तरह कनाडा के लोग मैपल के तने से एक सैप निकालते हैं जो होता तो गन्ने के रस जैसा मीठा ही है किंतु उसकी उपयोगिता गन्ने से कहीं अधिक है । मैपल के रस में विटामिन सी और बी के अतिरिक्त आयरन, कॉपर, ज़िंक, मैग्नीशियम, सोडियम और पोटेशियम जैसे माइक्रोन्यूट्रीन्ट्स भी पाये जाते हैं । मैपल का शाब्दिक अर्थ है शक्तिशाली, जिसके सैप में इतने माइक्रोन्यूट्रींट्स हों उसे शक्तिशाली तो होना ही है ।

ठण्डे इलाकों में पाये जाने वाले मैपल की कई ख़ूबसूरत प्रजातियाँ होती हैं । इसका सैप ही मीठा और गुणकारी नहीं होता बल्कि इसके तने की लकड़ी से गिटार भी बनाया जाता है जो सैप से भी अधिक मीठी ध्वनितरंगे निकालने के लिए जाना जाता है । टीक वुड की तरह मैपल वुड में भी टिम्बर डिज़ायन के ख़ूबसूरत पैटर्न पाये जाते हैं ।

...और हाँ! मैपल की उपयोगिता और ख़ूबसूरती के कारण ही कनाडा के राष्ट्रीय ध्वज में इसकी पत्ती को सम्मानजनक स्थान दिया गया है ।