१. मणिपुर
उनके पास धर्म था
उनके पास अहिफेन थी ।
लुटते रहे गाँव
जलते रहे गाँव
मरते रहे लोग
और अब
प्रारम्भ हो गया है
आरोपों-प्रत्यारोपों का सत्र ।
२. धर्म
मनुष्य ने नहीं
धर्म ने धर्म के घर तोड़े
धर्म ने धर्म के गाँव जलाये
धर्म ने धर्म से यौनदुष्कर्म किया
धर्म ने धर्म की हत्या कर दी
कोई ईसाई था कोई हिन्दू था
कोई कुकी था कोई मेयेती था
सूत्रधार भी
मनुष्य नहीं था ।
३. मादा
वह एक मादा थी
जिसे नोच रहा था
नरों का झुण्ड ।
नुचते-नुचते भी वह छोड़ गयी
नेताओं के लिये
एक और सीढ़ी ।
४. नर
वह नर है
नोच लेता है
अपने पंजों से
जहाँ भी दिख जाती है उसे
अकेली मनुष्यता ।
५. आग
यूँ ही नहीं धधकती कोई आग !
धुआँ तो
बरसों से हो रहा था
ईंधन तो
बरसों से झोंका जा रहा था
और अब ...
तुम निर्दोष होने का ढोंग करते हो !
