१. *पात्रता*

हमने
बाँट दीं तुम्हें डिग्रियाँ
घोषित कर दिया ज्ञानी 
बना दिया तुम्हें
अधिकारी
अब जाओ
लूट लो
पूरे देश को !

२. *अधिकार*

हमने
बना दिया तुम्हें महान
अब जाओ
पाप करो
ऐश करो !

३. *कब*

संत के वेश में
घूमने लगे हैं भेड़िये
हो रहा है सीताहरण हर क्षण
रावण को पहचानना
कब सीखोगी सीते !

४. *कौन*

नवरात्रि में
पूजते हैं कन्या
फिर कौन हैं वे
जो साल भर करते हैं बलात्कार
उन्हीं कन्याओं का ।

५. *समाधान*

उन्हें दिव्यांग कहा
और वे धन्य हो गये
सर्वांग दिव्य हो गये
प्रतीक्षा कर रहे हैं विपन्न
जब रख दिया जायेगा
उनका भी नाम सम्पन्न
और हो जायेंगे वे
विपन्नता से मुक्त
पूर्ण सम्पन्न

६. *सम्मान*

माथा झुकाते-झुकाते
माननीय के आगे
झुक गयी है कमर ।   
निर्लज्ज!
अब और कहाँ से लाऊँ
झूठा सम्मान
झोंकने
तेरी अकड़ के आगे !

७. *सत्ता-सूत्र*

गरीब-गुरबा को दान दो
ये भी दो वो भी दो...
शादी कराओ मकान दो
उसे उसकी गरीबी की पहचान दो
वो तुम्हारा मुरीद हो जायेगा
पक्का वोट बैंक हो जायेगा
उसका मत ही जनमत है
जनमत ही सत्ता का सूत्र है ।

८. *हक़*

हक़ नहीं है
सेना के जवानों को
आत्मरक्षा में गोली चलाने का
तुम तो बस
पत्थर खाते रहो यूँ ही ।