उनका आना भी तय था, 

उनका जाना भी तय था, 

पर ये होना ही क्यों था, 

ये मिलना ही क्यों था, 

हम सिर्फ़ उनके ही थे, 

पर वो हमारे न थे, 

हम तो अंजाने में थे, 

पर वो जमाने में क्यों थे, 

ख़ता न उनकी ही थी, 

भूल भी मेरी न थी, 

वजह बस उनकी ही थी, 

मेरी तो बस मज़बूरी ही थी......