वक़्त की बाँहें's image
530K

वक़्त की बाँहें

ना जाने वक़्त की बाँहें कितनी बड़ी हैं,

जब भी छू के निकलता है, सब समेट ले जाता है


वो सारे लम्हे, वो सब नज़ारे,

जिनकी मुझको, तुमको, सबको ज़रूरत है,

कुछ अधूरे ख़्वाब कामिल करने हैं,

कुछ ग़लतियाँ सुलझानी हैं,

Read More! Earn More! Learn More!