की अब हिम्मत टूट रहा है

की अब मुझसे अन्याय सहा नही जा रहा है

की जीने की वजह नही अब 

की इस भीड़ में कोई अपना नही अब

की कुरुक्षेत्र में वार मेरे पीठ पर हुआ है

की पलट कर देखा जब तो वो सारे अपने थे

की जब जब जिस से प्यार किया

की उसी ने मेरा इस्तेमाल किया

की अब भरोसा होता नही किसी पर

की कुछ इस कदर मुझे तोड़ा गया

की रोऊं किसे गले लगा के अब

की कोई गले लगाने वाला नही है

की अब आँखे भी बहना बंद कर दी

की वो भी समझ गई कि अब कोई चुप कराने वाला नही है......करूणा