फिर से वो मिट्टी का घोड़ा
फिर से वो झूला दिला दे
एक बार फिर से वही बचपन
मुझे एक बार फिर से लौटा दे
ना पता था ये दुनिया का सच
ना जाना समझा कोई जाल फरेब
फिर से वो मेला मुझे घुमा दे
फिर से दो गुब्बारे बस मुझे दिला दें
ना जानना किसी सवालों का जवाब
ना होना मुझे हकीकत से रूबरू
फिर से मुझे तू सवालों में उलझा दे
फिर से मुझे मुझको तू लौटा दे....
-करुणा


