कुछ शहर की सड़को पर मोमबत्तिया जरूर जलाएंगे । पर माफ़ करना बहन हम तेरी लड़ाई नहीं लड़ पाएंगे ।। कुछ झूठी बयानबाजी होगी, कोई नेता चिल्लायेगा, पक्ष संवेदना प्रकट करेगा, विपक्ष सत्ता हिलायेगा, एक नया मुद्दा मिलेगा संसद थप हो जाएगी, अच्छा है चलो इसी बहाने कुछ की दाल गल जाएगी, कुछ दिन हम अखबारों में सुर्खिया जरूर छपवाएंगे, पर माफ़ करना बहन, हम तेरी लड़ाई नहीं लड़ पाएंगे ।। कुछ आँखों में आंसू होंगे जनता सड़को पर आएगी, रैली जुलूस निकालेंगे, नारो से शोर मचाएगी, नेताओ की चौखट पर लाठी कोई खायेगा , बुद्धिजीवियों को बिठाकर बहस कोई करवाएगा , हम भी लाठी खाते-खाते सेल्फी जरूर खिचायेंगे, पर माफ़ करना बहन हम तेरी लड़ाई नहीं लड़ पाएंगे ।। गंदे भद्दे प्रश्नो का अदालत में अम्बार होगा, उस न्याय के मंदिर में गवाहों का व्यापार होगा , तारीखों पर तारीखे होंगी, इन्साफ धंधा बन जायेगा , कई साल बीत जायेंगे, मामला ठंडा हो जायेगा , आखिर हम आम आदमी है, हम गवाही नहीं दे पाएंगे , माफ़ करना बहन हम तेरी लड़ाई नहीं लड़ पाएंगे ।। फिर कोई लड़की चीखेगी, फिर कोई निर्भया आएगी , इंद्रप्रस्थ के दरबार में, फिर द्रौपदी चिल्लायेगी , फिर रैली जुलूस निकालेंगे, फिर सियासत गर्माएगी , इन्साफ फिर धंधा होगा, कहानी फिर दोहराएगी , कुछ दिन जरूर याद रखेंगे, फिर सब कुछ भूल जायेंगे , माफ़ करना बहन हम तेरी लड़ाई नहीं लड़ पाएंगे ।।