कल शाम मैं बाज़ार गया
और मैं बिक गया
पहले मेरे ख़्वाब बिके
फिर मेरा जिस्म बिका
और सब बिक गया
*
क्या बचा अब
तुम्हारे हमारे बीच
कुछ यादें, कुछ पल
या फिर कुछ भी नहीं
*
मैं जो समझता हूं
लोग उसे गलत समझते हैं
हां मैं गलत हूं
क्योंकि वो मुझे गलत समझती है
*
जब सब खत्म हो जाएगा
तब भी कुछ बचेगा
थोड़ा उम्मीद और थोड़ा गुंजाइश
की फिर से सब ठीक हो जाएगा
*
एक ज़माने में हम एक दूसरे को
दोस्त कहा करते थे
मैं तो अभी भी कहता हूं
मगर,
उसका पता नहीं
