संस्कार सब पाखण्ड है।समाज तो मतांध है।रीति - रिवाज़ रोग है।स्वभाव ही धर्म है।।मन्दिर - मस्जिद हद है।पूजा - पाठ व्यंग्य है।पंडित - मौलाना द्रव्य है।बाकी सब भय है।जानकर भी अज्ञ है।राम नाम सत्य है।।-CA. कर्नल