शांत होना चाहते हो,
इनाम दोगे क्या?
सब कुछ तो आपका है,
प्राण भी अब लोगे क्या?
जीवन के लिए प्राण।
प्राण के लिए भी प्राण।।
प्राण के लिए कुछ है क्या?
प्रतिफल मांगते हो,
मैं तो सौदा जानता हूँ।
औ, श्री भी कहलाते हो।।
प्राण है; अरमान है,
मैं और ज्ञान है।
सूना - संसार है,
मम और सौदा भी है।।
खोज भी मेरी है,
सर्वस्व भी मेरा है,
तेरा कुछ है क्या?
आत्मा - प्रमात्मा।।

