"ठंडी रातों में एक रोशनी जगी है,बर्फ के नीचे एक नई ज़मीन बनी है।ज़िंदगी चाहे कितनी भी थक जाए,उम्मीद के दीये में हमेशा बाती लगी है।"
"ठंडी रातों में एक रोशनी जगी है,बर्फ के नीचे एक नई ज़मीन बनी है।
ज़िंदगी चाहे कितनी भी थक जाए,उम्मीद के दीये में हमेशा बाती लगी है।"