मुझे तुम्हारी तस्वीरें देखना पसंद है मगर सिर्फ पुरानी,नई नहीं ।। नई तस्वीरों में तुम, तुम नहीं नज़र आती कोई और ही दिखता है, मगर पुरानी में, तुम, तुम ही होती हो ।। इन नई तस्वीरों में तुम्हारी हँसी मेरे लिए नहीं होती, तुम्हारी ख़ुशी मेरी वजह से नहीं होती और वो होठों केे किनारे में हल्का सा काला पन मेरे होठों की वजह से नहीं होता ।। पुरानी तस्वीरों को तो मैं अच्छे से पहचानता हूँ, मेरी बिना सर पैर वाली बातों पर तुम खूब हँसा करती थी, मैं जब सब से छुप कर तुम्हे एक टुक निहारता था तो तुम ख़ुश हुआ करती थी, और कई दफा शिकायत की है तुमने कि मैं हमेशा तुम्हारे होठों पर हमारी मुहब्बत के निशान छोड़ देता हूँ ।। मुझे तुम्हारी ऐसी ही तस्वीर देखना पसंद है जिसे मैं पहचानता हूँ, क्योंकि नई तस्वीरों में तुम तुम नहीं नज़र आती ।।