बातें भी ज़रिया होती हैं
दिलों से दिल मिलाने का
होठों पे हंसी उगाने का
रुक रुक कर वक्त चलाने का
ज़रा सा घुल-मिल जाने का ।।
बातें भी ज़रिया होती हैं,
आशिक का दिल जलाने का
ग़ज़लों का बनते जाने का
धक-धक कर दिल धड़काने का
तुम को मैं याद आने का ।।
बातें भी ज़रिया होती हैं,
भूले को राह दिखाने का
रूठों को फिर से मनाने का
मिल मिल कर के मिल जाने का
फिर से संसार बसाने का ।।
बातें भी ज़रिया होती हैं,
अपनी आवाज़ उठाने का
झूठे दावे झुठलाने का
लड़ लड़ के जीत जाने का
रोशनी को घर ले आने का ।।
बातें भी ज़रिया होती हैं
फूलों को फिर महकाने का
आँगन आँगन सजाने का
कल कल कर के बह जाने का
तुझ में, मुझ में खो जाने का ।
बातें,
हर बात का जरिया हो सकती हैं
बशर्ते
बातें अच्छी की जाएँ
बिल्कुल सच्ची की जाएँ ।।
-सहर