तेरा ख़्वाब ना आए वो रात मंज़ूर नहीं !
तेरा ज़िक्र ना हो वो बात मंज़ूर नहीं !
तेरी ख़ुशबू ना हो वो बहार मंज़ूर नहीं !
जिसमें तेरा एहसास ना हो वो बरसात मंज़ूर नहीं !
जिसमें तेरी मोहब्बत ना हो वो धड़कन मंज़ूर नहीं !
जिसमें तेरा चेहरा ना दिखे वो जाम मंज़ूर नहीं !
जो तेरी क़दर ना करे वो आवाम मंज़ूर नहीं !
जो तू ना हो तो ये ज़िंदगी ही मंज़ूर नहीं !!


