तेरे इश्क़ में मैंने ज़िन्दगी को खोया था
तेरे इश्क़ में आँख तो क्या हर आंशु भी रोया था
तेरे इश्क़ में हमने अपनो को छोड़ा था
तेरे संग प्रीत लगाने के लिए कुछ पुराने रिश्तों को तोड़ा था
तू समझ ना सकी उन बातों को
मार के ठोकर चली गयी हमारे जज़्बातों को
तुमने अपने लमहों को हमारे लमहों से अधिक मूल्यवान माना था
थोड़ा इंतज़ार और कर लो ये कहना तो बस बहाना था
खेर अब तो वस तेरी यादों के समन्दर में डूबे रहते है
मदमस्त पंछी की तरह ख़्यालों में बहते रहते हैं


