मुश्किलें हज़ार है जिंदगी की राहों मे,
उठो जागो आलस छोड़ो कब तब पड़े रहोगे नींद की बाहों मे/
जो चाहिए उसके लिए कोशिश तो कर,
बस वो मादा होना चाहिए आपकी चाहों मे //
जिंदगी तो लहरों की तरह है ये ना मुश्किल है ना आसाँ है,
सबने अपनी अपनी सहूलियत के मद्देनज़र की इसकी अलग अलग कहानी बयाँ है //
की जमीन तो बही है हमने ही बनाया इसे कही हरा भरा तो कहीं रेगिस्तां है //
औरों पर अपनी नाक़ामयाबियों का बोझ देने की सीखी तुमने कला है ,
ऐसे तो खुद को ही अँधेरे मे धकेल रहे हो ऐसे तो कौन चलता भला है //
परिवर्तन परिवर्तन कहते कहते ये किस दिशा मे परिवर्तित हो गए हो,
औरों को जगाते जगाते खुद कहाँ खो गए हो //
औरों को कैसे हराना है बस ये सोच तुम्हे पड़ी है,
हारना हराना भूल के औरों को कैसे जितना है ये सोच बड़ी है //
सब नजरिए की तो बात है ,
जब तुम असफल थे वो दिन औरों के लिए हो सकता है उजाले भरा , तुम्हारे लिए तो अँधेरी रात है //
बलिदान ही है जिंदगी का सच, ये तो करना ही पड़ता है,
छायादार बृक्ष बनने के लिए बीज को अंकुरित हो के फूटना ही पड़ता है //
बनोगे तुम मिटटी या स्वर्ण ये तो तुम्हारे संकल्प पर आधारित करेगा,
भविष्य को वर्तमान निर्धारित करेगा //
मिटटी का बो ही कण स्वर्ण कहलाएगा जो आत्म विश्लेषण की ज्वाला में ख़ुद को तपाएगा//


