चारों तरफ़ तेज़ आँधिया चल रही थी ,

बहुत से दीये बुझा गयी थी वो आँधी पर मोहब्ब्बत की लौ फिर भी जल रही थी !

बहुत से चिराग़ों को रोते देखा था हमने ,

बहुत से जुगनुओं को मोहब्बत में अपना जीवन खो कर हमेशा के लिए सोते देखा था हमने !

कुछ दीये अभी भी फड़फड़ा रहे थे ,

इशक नहीं आसान बता रहे थे !

फिर भी कितने ही जुगनू महबूब से पहले ख़ाक होने की होड़ में ,उन बूझते दीयों में कूदते जा रहे थे !

तभी कुछ परिंदे उस मोहब्बत के  बवंडर में खो गए ,

आज हमारा महबूब लेने आया है कहते कहते मुकम्मल नींद सो गए !