
चारों तरफ़ तेज़ आँधिया चल रही थी ,
बहुत से दीये बुझा गयी थी वो आँधी पर मोहब्ब्बत की लौ फिर भी जल रही थी !
बहुत से चिराग़ों को रोते देखा था हमने ,
बहुत से जुगनुओं को मोहब्बत में अपना जीवन खो कर हमेशा के लिए सोते देखा था हमने !
कुछ दीये अभी भी फड़फड़ा रहे थे ,
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