
इक नयी सहर हुई , अब उठ खड़ा हो तू !
हर इक सहर के साथ इक दिन तू खो रहा है !
नींद में किसके सपने सच हुए हैं जो तू अब तक सो रहा है !!
आने वाली ज़िन्दगी में तू वो ही काटेगा जिसके बीज आज वो रहा है !!
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इक नयी सहर हुई , अब उठ खड़ा हो तू !
हर इक सहर के साथ इक दिन तू खो रहा है !
नींद में किसके सपने सच हुए हैं जो तू अब तक सो रहा है !!
आने वाली ज़िन्दगी में तू वो ही काटेगा जिसके बीज आज वो रहा है !!