माँ तेरे मातृत्व की वारिस अक्सर मुझ नादाँ पर अक्सर होती थी, अक्सर तू मेरी गलतिओं पर मेरे सामने मुस्कुरा के चुपके से रोती थी , माँ तेरे मातृत्व की वारिस अक्सर मुझ नादाँ पर अक्सर होती थी !! मेरे जीवन को तूने अपने रक्त से सींचा था , जन्नत थी तेरी गोद मेरे लिए , तेरे आँचल में छुप जाने के लिए मैने भी चुपके से आँखों को मींचा था ! खुद कड़ी धूप में चलकर तू हमने आँचल में छुपा लेती थी , हमने खिल खिला के हँसता देख कर तू अपने सारे दुख भुला लेती थी ! माँ तेरे मातृत्व की वारिस अक्सर मुझ नादाँ पर अक्सर होती थी, अक्सर तू मेरी गलतिओं पर मेरे सामने मुस्कुरा के चुपके से रोती थी , माँ तेरे मातृत्व की वारिस अक्सर मुझ नादाँ पर अक्सर होती थी !! खुद कड़ी धूप में चलकर तू हमने आँचल में छुपा लेती थी , हमने खिल खिला के हँसता देख कर तू अपने सारे दुख भुला लेती थी ! माँ तू पापा से लड़कर अक्सर मेरी ख्वाइशें पूरी करती थी , कहीं तेरा बेटा मायूस न हो जाये ये सोच कर भी डरती थी !! तू नयी नयी कहानिआ सुनाकर हमारा मन बहलाती थी , तेरी गोद में ही सो जाता था में जब तू मेरे बालों को सहलाती थी !!