कुछ बेनाम ख़त भेजे थे हमने,
तुमने किसी और के समझ कर वापिस मोड़ दिए !
पढ़ तो लेते कम से कम उनको,
बिना सूँघे ही कुछ फूल नयी नस्ल के तोड़ दिए !!
कुछ रंग हमने हवा में घोले थे !
बहुत कोशिश की थी तुमको पाने की पर रह गए अकेले थे !!
ज़िंदगी तुमसे दूर रहके रसबिहीन हो गयी है !
सम्बेदना नहीं रही ह्रदय में कोई , बस एक धड़कने वाली मशीन हो गयी है !!
आज फिर तेरी यादों की हल्की हल्की सी रूत आयी है !
आज फिर एक चिठ्ठी हाल ए दिल लिखकर हमने तेरे पते पर भिजवाई है !!
उम्मीद है इस मौसम का भी तुम आने से पहले ही कत्ले आम कर दोगी !
कोई टूटा तारा लगता है कह के हमारे इश्क़ को बदनाम कर दोगी !
अब इसे हम नासमझी कहे या मोहब्बत की तौहीन !
पर आज फिर तुम हमारी मोहब्बत सरे बाज़ार नीलाम कर दोगी !
आज फिर उस खुदा ने बिन मौसम बरसात की !
आज फिर मेरी आँखों ने आँसुओ से मुलाक़ात की !!
आज फिर महखाने के प्यालों में में खोया हूँ !
आज फिर जाम से भरे प्याले से बात करते करते रोया हूँ !!
