इतना ग़रूर ना कर अपने  हुस्न पर ,

ज़िन्दगी में उलझने और भी बहुत हैं !!

हम उनको सुलझायें की तुमको समझायें !!

इतना ग़रूर ना कर अपनी आँखों पर ,

ज़िन्दगी में और भी बहुत ख़ूबसूरती है !

हम उसे देखें कि तेरी आँखों के समंदर में डूब जाएँ

!!

इतना ग़रूर ना कर अपनी कोयल जैसी आवाज़ पर,

ज़िन्दगी में और भी बहुत सुनने को है !

हम उन्हें भी सुने की बस तुम्हें ही रमते जाएँ !!

इतना ग़रूर ना करना अपनी ख़ुशबू पर,

ज़िन्दगी में और भी बहुत  सुगंध फैली है !

हम उसका भी एहसास करें की बस तेरी ख़ुशबू में खो जाएँ !!

हमसे इतनी उम्मीद ना रखना अपने हंस जैसे रूप की बड़ाई की ,

दुनिया में और भी बहुत कुछ है देखने को !

हम उसको निहारें की बस तेरे ही रूप के गीत गाएँ !!

इतना ग़रूर ना कर अपने  हुस्न पर ,

ज़िन्दगी में उलझने और भी बहुत हैं !!

हम उनको सुलझायें की तुमको समझायें !!