कल मैं अपने घर की तरफ जा रहा था तो देखा जंगल जगमगा रखा था , जो सघन अंधेरो में रहता था लालिमा लालिमा ही थी बहां ! मानो जैसे दुल्हन की तरह सजा रखा था ! मुझे लगा चलो देख के आते हैं शायद कोई दावत चल रही है , एकाएक में रुक गया , ओह ये क्या बृक्षों की आत्मा जल रही है ! बचाओ बचाओ ये कह के कोई चिल्ला रहा था , मैं भागा उस आवाज की तरफ तो देखा एक नन्हा खरगोश जो अब सिर्फ राख का ढेर बन गया था ! शायद यही था जो मुझे मरते मरते बुला रहा था !! एक उम्मीद से की शायद अभी कुछ जान बाकि है इसमें , मैंने अपना हाथ उसकी तरफ बढ़ाया ! हद है तेरे मतलबीपन की अब तू मुझे खाना चाहता है मिट्टी होते होते वो चिलाया ! आग लगी थी जंगल में ,धीरे धीरे सारा जंगल सिमट रहा था , हर एक प्राणी इंसानो पर थू थू करते करते मौत से लिपट रहा था ! तभी मेरा ध्यान चाँद की तरफ गया आज उसका रंग कुछ और लगा मुझे, वो गुस्से से लाल हो रखा था , तुम इंसान अपनी औकात दिखा ही देते हो कभी ना कभी मानो उसको ये मलाल हो रखा था ! दिल पर पत्थर रखकर में थोड़ा आगे बढ़ा तो आग बुझाओ आग बुझाओ कुछ लोग चिल्ला रहे थे , कुछ को मैंने कहते सुना यार हमने तो जंगल को जलाने के लिए आग लगाई थी अब ये तो हमारे घरो की तरफ चल आयी थी , कहते कहते फायर ब्रिगेड बुला रहा थे ! बचाओ बचाओ अब वो लोग चिल्ला रहे थे !!