हमारी मोहब्बत यूँ बेबफा ना होती अगर ज़ालिम ये ज़माना ना होता, अगर तुम रहती मेरी ज़िंदगी में तो पागल ये दीवाना ना होता ! बात ही कुछ और होती अगर ज़माने की आड़ में तुमने हमें किया बेगाना ना होता, हम भी बेफ़िकर परिंदे होते अगर टूटा हमारा मोहब्बत का आशियाना ना होता !! ख़ैर ज़िंदगी में कुछ ना होते हम , अगर छेड़ा तुमने मोहब्बत का तराना ना होता .! मैं शायर ही नहीं होता , अगर जिंदगी में तुम्हारी मोहब्बत का अफसाना ना होता ! हमारी मोहब्बत यूँ बेबफा ना होती अगर ज़ालिम ये ज़माना ना होता, अगर तुम रहती मेरी ज़िंदगी में तो पागल ये दीवाना ना होता ! तुमने भूलने की बहुत कोशिश करते हैं , और शायद भूल भी जाते ! अगर सपनो में तुम्हारा बार बार आना ना होता ! पर चलो अच्छा है, कुछ तो बजह है जीने की , कब के जिंदगी से रुखसत हो जाते हम , अगर तुमसे सपनो में मिलने का बहाना ना होता ! बस एक ही शिकवा है तुमसे , काश तो जिंदगी के सफर में हमें तनहा छोड़ अकेला रवाना ना होता !! हमारी मोहब्बत यूँ बेबफा ना होती अगर ज़ालिम ये ज़माना ना होता, अगर तुम रहती मेरी ज़िंदगी में तो पागल ये दीवाना ना होता !