उतारि गई नज़र कई बार,
जब...जब होता तकलीफ में कोई घर का,
रात भर जगती देखभाल में वो,
चाहे झुकती उनकी आँखे सुकून की खोज में,
वो लड़ जाती अपनी आँखों से,
पर ना सुखने देती,
उस सिर पे रखे कपड़े को,
ये माँ ही तो है,
जो अपने हिस्से की खुशियां भी,
सब में बाँटे चलती है।
करन/@karanrajput0911/@kavishala_hindi


