तुम बोलो मैं तुम्हें सुनाऊँ क्या,

मैं तुमसे दिल्लगी कर जाउँ क्या,

तुम फूल की तरह हो,

मैं उसकी खुशबू हो जाऊँ क्या,

तुम पहली बात सी लगती हो,

मैं उसकी मुलाकात हो जाऊँ क्या,

तुम एक जगती रात सी हो,

मैं उस रात का तारा बन जाऊँ क्या,

तुम बारिश की बूंदों सी हो,

मैं धरती की मिट्टी हो जाऊँ क्या,

तुम सफर सा होना चाहती हो,

तुम बोलो,

मैं सफर की मंजिल बन जाऊँ क्या!!!

करन/@karanrajput0911/@kavishala_hindi