
जहन में आकर,
रूह को छूकर,
तुम चुपचाप गुजर जाना,
बारिश की हवा की तरह आना,
मिट्टी की खुशबू की तरह चुपचाप गुजर जाना,
रोकेगी तुम्हें हमारी तन्हाई,
थामना चाहेगी तुम्हारा हाथ,
पर तुम चुपचाप गुजर जाना,
बेबस खुद को दिखाएगी तन्हाई,
पर तु
Read More! Earn More! Learn More!
