मैं चला जा रहा हूँ,
एक अनजानी सी डगर पे,
जिसमें न तो सफर का पता है,
न मंजिल का,
बस चला जा रहा हूँ।
इस राह में मुश्किलें है बहोत,
पर मैं चला जा रहा हूँ।
ना जाने कितनी बार गिरा हूँ,
मैं इस डगर में,
फिर भी चला जा रहा हूँ।
लोगों ने तो बहोत कोशिश की पीछे रोकने की,
पर मैं उन लोगों को पीछे छोड़,
चला जा रहा हूँ।
कुछ अच्छें लम्हें हैं इस डगर पे,
मैं उन लम्हों को समेटे,
चला जा रहा हूँ।
अंजाम नहीं पता इस डगर पे चलने का,
बेखोफ बस चला जा रहा हूँ।
करन/@karanrajput0911/@kavishala_hindi

