
वक्त
ली है कैसी करवट
आज वक्त ने
आज़ादी से उड़ने वाले
बंद हैं चार दीवारों में
रहते थे जो साथ, रात दिन
वो आज डरते हैं
मिलने से हक़ीक़त में
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ली है कैसी करवट
आज वक्त ने
आज़ादी से उड़ने वाले
बंद हैं चार दीवारों में
रहते थे जो साथ, रात दिन
वो आज डरते हैं
मिलने से हक़ीक़त में