मिलोगे कभी ज़िंदगी के
किसी मोड़ पर तो पूछेंगे,
कटी कैसी ज़िंदगी बिन हमारे
तन्हाई में कभी
याद हमारी आयी तो होगी
सोंच कर कभी हमारे बारे में
आँखें नम हुई तो होंगी
अक्स आईने में अपना देख
हमारी सूरत नज़र आयी तो होगी
किताबों के पन्नों में
दास्तान हमारी उभर आयी होगी
दुनिया की भीड़ में
नज़रें हमें ढूँढती तो होंगी
मिलोगे कभी ज़िंदगी के
किसी मोड़ पर तो पूछेंगे

१६ जुलाई २०२४
जिनेवा