होती ज़ुबान अश्क़ों की, तो बताते
बहते हैं किसकी याद में
कर पाती नज़र गुफ़्तगू, तो बताती
बसते हैं किसके ख़्वाब इनमें
बोल पाता दिल, तो बताता
धड़कता है किसकी चाह में
महसूस करवा पता मन, तो बताता
उठतीं हैं एहसासों की लहर
किसके नाम की
ज़ाहिर कर पाते आरज़ू, तो बताते
फ़ना हुए जातें हैं
किसके इश्क़ में

