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यूं ही नहीं इन वादियों में ये सुरूर है..

यूं ही नहीं इन वादियों में ये सुरूर है

कुछ तो करीब से गुजरा जरूर है

इस पानी सा बहता मेरा मन

और ये सर्द हवांए

हाथो में हाथ लिए बैठा मैं वो खुद एक नूर है

छुपा आसमानो में चांद जाकर

यूं बादलो की आड़ में

कुछ शक जो देख मेरे नूर को

उसे खुद पर हुआ जरूर है

रिम झिम रिम झिम बरसता बादल

छूने को इसको आसमानो से होता फिर खुद क्यूं दूर है

ये सफर ज

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