जज्बात मेरे, भले ही गुजरे हों,
काले गहरे अंधियारों से,
और मन मेरा भर भी आया हों,
कहीं जली कटी बातों से,
बहरहाल
मैं शायर सफ़ेद हूँ
मैं लिखता सफ़ेद हूँ
मैं सफ़ेद हूँ
भले ही शाम ने मुझे ना थामा हों,
गिरते पड़ते रहने से,
और रात ने मुझे रुलाया हों,
कही भयावह किस्सों से,
बहरहाल
मैं सुबहों सफ़ेद हूँ
मैं दिखता सफ़ेद हूँ
मैं सफ़ेद हूँ
