Shayar Sehori and The Hurtness


परों से कँटीले रुएँ उतर क्यों नहीं जाते ,

तुम मेरी नज़र में मर चुके ,

गुज़र क्यों नहीं जाते ।


मेरे दर्द ने भी क्या - क्या न कमाल किया ,

कल तकिए ने मुझसे एक सवाल किया ,

क्या कभी भी उसका मन पसीजता है 

जिसके लिए मेरा कवर रोज़ भीगता है ।


 कुछ धुंधला सा है , न- बयां है , जब से एक सख़्श गया है 


ज़िन्दगी में ज़िन्दगी से हर सख्श परेशान देखा है ,

हर एक बेईमान का दुकान पर ईमान देखा ,

आदमी के अंदर का हैवान तो देखा है ,

औरत के अंदर की शैतान कैसे देखी जाए ।


छोड़ के गए तुम राह दरमियान में ,

याद करोगे हमें उम्र के ढलान में ,

भूल जाते हैं जवानी के उफ़ान में ,

पैसा प्यार नहीं देता बड़े मकान में ।


कार , घर , रूतबे का न दिखावा किया करो ,

अंदर से जैसे हो वैसा ही पहनावा किया करो ,

आज भी दौलत शख्सियत के पैरो तले है ,

दूसरों के दम पर उछलकर न दावा किया करो ।


इश्क़ में कुछ अपना नहीं बचता ,

फितरत भी विदेशी हो जाती है ,

जब इन्सान प्यार में होते हैं दोनो की शक्ल एक जैसी हो जाती है ।


तकलीफ़ ऐसी कि सीने को फ़ाड़ कर गुज़र जाए ,

ये भी न हो दिल दुखने में , गिरते हुए और गिर जाएं ,

इतने सितम भी मत कर ज़िन्दगी हम पर ,

जीने का मतलब न हो और जीते जी मर जाएँ । 12.10.20



उसकी यादों का लम्हा मुझ से सम्हाला नहीं जाता ,

जैसे बड़े समंदर में से सिक्का खंगाला नहीं जाता ,

मुझे बर्बाद करके उसने तो कभी भी उफ़ तक न किया ,

मुझ से उसका दाग़दार नाम भी उछाला नहीं जाता ।

(20 oct 20) 



हर बात से तकल्लुफ है इतना चिड़चिड़ा हो गया हूं मैं ,

तेरे छोड़ के जाने के बाद से ही तेरी तरह हो गया हूं मैं ।


चेहरे की चमक बीमार में क्या होगी ' शिफ़ा ,

ज़िन्दगी बची नहीं , जीता-जागता मुर्दा हो गया हूं मैं ।

(02.11.2020)



मुझे वो पल दो पल में ज़िन्दगी भर का जीना याद आता है ,

जहां पहली बार तेरा हाथ थामा था वो मरीना याद आता है ।


क्या करूं जो उभरा नहीं दिल तेरी यादों से अब तक ,

मुझे अब तक वो सफर , वो नवंबर का महीना याद आता है ।

(03.11.2020)



कुछ तो उसके साथ उम्र गुज़ार के मरते ,

हम अपने छुटपुट अरमान संवार के मरते ,

यहां कौन है जो मरेगा नहीं एक दिन ,

वो जीत जाते हमसे इश्क में हम हार के मरते । 24.12.20


कभी इतना भी ज़िंदगी में इत्मिनान न हो ,

वो बेपरवाह हो और हम परेशान न हो । 

02.02.21