तुम जा रही हो छोड़ कर कोई परवाह नही,
जिंदगी में नये हमसफर की मुझे चाह नही,
जमाने भर से कहूंगा बहुत ज्यादा खुश हूं मैं,
हकीकत में मेरे इस गम की कोई थाह नही।
तुमने भी मुझको ही गुनाहगार मान लिया ?
मुझको तुमने इतना गिरा हुआ जान लिया ?
सफाई पेश करने का तुमने मौका नही दिया,
शक की बुनियाद पर ही मुजरिम मान लिया ?
तुमसे कई शिकायत है मगर कुछ ना कहुँगा,
पहले से मौन था मैं आगे भी मैं चुप ही रहूँगा,
चाहे कितनी ही तकलीफे मिले मुझे लेकिन,
तुम्हारी ख़ुशी के खातिर मैं ये सारे दुःख सहूंगा।
खेर छोडो ये सब बातें ये बातें तो बहुत पुरानी,
नये सिरे से तुम्हे लिखनी है तुम्हारी नई कहानी,
सुयश मिलता रहें तुम्हे तुम्हारे कदम कदम पर,
पा लो मंजिल तुम तुम्हारी जिंदगी हो सुहानी।
कपिल बासवाल


