आज मौत से मेरी मुलाकात हो गई,

अनकही थी जो बातें वो बात हो गई।


सपने जो रहे अधूरे, अरमान जो हो ना सके पुरे,

अधूरे सपने और अरमानों को जलाने की शुरुआत हो गई।


अब ना है कोई दोस्त ना ही कोई दुश्मन मेरा,

मेरे जनाजे में दोनों की एक ही जमात हो गई।


'कपिल' दौर -एं- जिंदगी में यह मंजर भी आयेगा,

सुबह को चलोगे पहुंचकर देखोगे की रात हो गई।


ख्वाब था ये मगर इतना मुक्कमल मुझे लगा,

जैसे अरसे से अधूरी कोई पूरी फरियाद हो गई। 


आज मौत से मेरी मुलाकात हो गई

अनकही थी जो बातें वो बात हो गई।