चल रहा है चाँद और रात भी है ढल रही,

कुछ इस तरह से मेरी जिंदगी निकल रही।


जिंदगी का मेरी यह सबसे कठिन दौर है,

तब हालात और थे अब हालात और है,

मुश्किलों से लड़कर भी ना आगे बढ़ पाया हूँ,

गैरों की क्या बात कहूँ अपनों से पराया हूँ,

आज मेरी दास्तां कलम मेरी उगल रही,

चल रहा है चाँद और रात भी है ढल रही।


जिंदगी का मेरी बस एक ही अफ़साना है,

उन्हीं ने छोड़ा है मुझे जिन्हीं को मैंने माना है,

मैंने इस तरह से कभी नही बताया है ,

आज मेरा दिल किसी ने फिर से दुखाया है,

गलतियां जो की ही नही उन्हीं की सजा मिल

चल रहा है चाँद और रात भी है ढल रही।


चल रहा है चाँद और रात भी है ढल रही,

कुछ इस तरह से मेरी जिंदगी निकल रही।


:- कपिल बासवाल

@kapilbaswal12