दिन लगता है पंख लगाकर उड़ जाते हैं, नहीं लौटकर दोबारा फिर वो आते हैं| कितने सुंदर उजले से दिन खिल खिल हँसते चहकते दिन कभी उदासी में डूबे दिन कभी आंसुओं में भीगे दिन क्यों न लौटकर दोबारा फिर वो आते हैं दिन लगता है पंख लगाकर उड़ जाते हैं|