आंखों से देखा तो कोई अलौकिक आकृति दिखी,
कानो से सुना तो अद्वितिय गीत सुना ।।
तन ने छुआ तो अनदेखा रंग चढ़ा,
आत्मा से मिलाया तो संपूर्णता का आभास हुआ ।।
कैसे बैरंग सी दुनिया कह दूं मैं ,
जबकि मुझे प्रकृति ने इतने अंगिनत रंगों से नहलाया ।।
इस भाग दौड़ वाली दुनिया मे ,
अमूल्यता से मिलाप कराया है।।
"प्रकृति की गोद में हर रोग के प्रतिशोध में"❤️


