पंछी बन कर तुम उड़ो
बाजों से तुम न डरो
छुओ आसमान की ऊंचाइयों को तुम
न डर कर तुम यू रहो ।
ये दुनिया हैं तुम्हें दबाएगी
तुम्हें लाख़ ठोकरे भी दे जाएंगी
पर हिम्मत के साथ तुम खड़े रहो
आगे बस बढ़ते रहो ।
मेहनत से डरोगे तो कामयाब न हो पाओगे
इस प्रतियोगिता की दुनिया में तुम पीछे ही रह जाओगे
इसको पार कर सकते हो तुम अपनी मेहनत से
नहीं हो पाओगे कभी सफल किसी मन्नत से।
आसान नहीं हैं ये रास्ता यहां कंकर बहुत होंगे
कोई नहीं चलेगा साथ यहाँ चलने वाले सिर्फ तुम खुद होंगे ।
करते है मेहनत पिता तुम्हारे
उनकी मेहनत को ना तुम कभी भुलाना
उनकी उम्मीदों को सच करके तुम्हे दिखाना
अबकी बार खुद को ना देना कोई बहाना ।
तक़दीर की लकीरें भी चलेंगी साथ
अगर ठान लो की नहीं रुकना है अबकी बार।
रास्ता हैं कठिन , इस पर रूकावटे होंगी हजार
मंजिल पर पहुँच कर भी न करना कभी तुम आराम ।
मंजिल पर पहुँच कर होगा तुम्हें यकीन
मेहनत करने वाले नही होते आराम के शौकीन।
जिस दिन तुम गाड़ोगे अपने नाम के झंडे
नही रहेगा तब तुम्हे भय किसी का चाहे वो हो फांसी के फंदे।
तो आज गांठ बांधलो तुम मेरी एक बात
की करते रहो मेहनत चाहे दिन हो या रात ।।
- कनिष्का गर्ग (कक्षा - दसवीं)


