सुनाने को बहोत कुछ है ,

पर सुनने को तुम राज़ी हो क्या!

कहो ना राजी हो क्या?

वक्त तो मेरा भी कीमती है,

तुम अपना देने को तैयार हो क्या!

कहो ना तैयार हो क्या?

ख्वाब तो देखे मैने भी थे,

उसे महसूस कराने को व्याकुल हो क्या!

कहो ना व्याकुल हो क्या?

ख्वाबो में कहे लफ्ज़ थे मैने,

उसे हकीकत के पन्नो पर उतारोगे क्या!

कहो ना उतारोगे क्या?

कहानी के कुछ किस्से अनसुने थे,

कहो क्या तुम बतलाओगे क्या!

कहो ना बतलाओगे क्या?

मै दुनिया से लड़ने को बेताब हूँ,

तुम साथ देपाओगे क्या!

कहो ना देपाओगे क्या?

रात तो मेरी भी कट रही थी,

तुम साथ गुज़ारने को राज़ी हो क्या!

कहो तो सही गुज़ारोगे क्या?

चलो नई शुरुआत करता हु,

तुम साथ रहोगे क्या!

कहो तो सही रहोगे क्या?

मै लिख दु कुछ बाते दिल की,

तुम पढ़ना चाहोगे क्या!

बताओ बताओ चाहोगे क्या?


©कंदर्प पण्डया