धरा का कोई ऐसा छोड़ नहीं
जहां मिल सके तुम्हें कुछ बेजोड़-
कुछ खास।
यहां हर आम में ही खास है,
लेकिन कोई खास पर गौर करो तो वह खूब आम है।
हलवाई के मिठाई को किसने देखा है
या किसने देखा ग्वाले के दूध को,
किसी कुजड़िन की तरकारी?
हलवाई हमेशा घी में ही छानता हैं क्यों पकवान-
कुजड़िन की सब्जी घंटे भर पहले खेत के पौधे से लगी थी।
हाँ, ये समान जो देखे यही है बेजोड़,
पर नजर तुम्हारे है, जबान उसके।
उसकी मजबूरी है समझाना क्रेता को-
नहीं मिलेगी यह शुद्धता कहीं और...
क्यों?
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