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वो तो नज़र ही कातिल थी वर्ना वज़ह क्या थी नैना मिलने की,

वो तो मोहब्बत हो गई वर्ना अपनी उमर ही क्या थी शायरी लिखने की।

— कनक रंजन ठाकुर
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