इंतजार की घड़ियाँ खत्म होने को हैं, ✈️
नई यादें फिर एक बार एहसास के पन्नों पे दर्ज होने को हैं, ?
नई इबादत लिए, मिन्नतें करने फिर एक बार आशियाने में पहुँचने को हैं, ?
रूठी, नासमझ बूबू को मनाने को हैं... प्यारी बहना को फिर एक बार सताने को हैं... ?
हम तैयार बैठेंगे सुबह की पहली किरण की आस में, वैसे एहसास को नींद कहाँ आने को हैं...?
to बूबू
.. ehsaas @kamleshsrtandan
WTS 01
