तेरे ख्वाबों में बसी है मेरी हर रात की रवानी,बेताबी की हर धड़कन, तुझसे मिली है ज़िंदगानी।मुलाकात का सबब न हो, पर एहसास रूह सा गहरा,जब तक हैं ये कायनात, तु ही मेरा नूर-ए-सफर।
तेरे ख्वाबों में बसी है मेरी हर रात की रवानी,बेताबी की हर धड़कन, तुझसे मिली है ज़िंदगानी।
मुलाकात का सबब न हो, पर एहसास रूह सा गहरा,जब तक हैं ये कायनात, तु ही मेरा नूर-ए-सफर।