Poetry 1 min read 470.1K reads

ehsaas 1.1


तेरे ख्वाबों में बसी है मेरी हर रात की रवानी,बेताबी की हर धड़कन, तुझसे मिली है ज़िंदगानी।

मुलाकात का सबब न हो, पर एहसास रूह सा गहरा,जब तक हैं ये कायनात, तु ही मेरा नूर-ए-सफर।

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