सत्य का ख़्याल दुनिया में
बिल्कुल साफ़-सुथरा है
सत्य ही दूरदर्शी है
सत्य ही वास्तविक चेहरा है।

सत्य बहुत गहरा है
सत्य क्रांतिकारी है।

जब अहम् नहीं रहता
जब सुख और तृप्ति की भावना का
कोई मोल नहीं रहता
तब सत्य प्रकट रहता है।

मनुष्य के लिए सत्य
बहुत बड़ी चीज़ है
सत्य में साहित्य नज़र आता है
और साहित्य का सम्बन्ध स्वयं से आता है।

मनुष्य जब तक है तभी तक
उसके दोस्त या दुश्मन है
मरने के बाद न कोई दोस्त
न कोई दुश्मन है
अंततः शुद्ध प्रेम ही सत्य हो जाता है।

- © कामिनी मोहन पाण्डेय।