200. मज़बूत पकड़ को
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200. मज़बूत पकड़ को - कामिनी मोहन।

संख्याएं कभी खत्म नहीं होती हैं
शून्य से शुरु होकर
अनंत की ओर बढ़ती रहती है।

कुछ लोगों को अतीत से चोट लगती है
उन्हें ख़ुशियों की गिनती
हमेशा कम-कम लगती हैं।

इस दुनिया में प्यार बेशुमार है
लेकिन एक ही प्यार
यहाँ कभी मिलता नहीं दो बार है।

जीवन आसन्न है
हम क्या कर सकते हैं?
जानते नहीं है।
वास्तव में कोई आ जाए और बताए
कैसे धीमें-ध
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